WhatsApp Facebook
Hanuman Chalisa
Home Privacy Policy Disclaimer Contact Terms and Conditions

Hanuman ji

Hanuman ji
Shri Ram Darbar

Hanuman Ashtak full Pdf : संकट मोचन हनुमान अष्टक

Hanuman Ashtak full Pdf: संकट मोचन हनुमान अष्टक


Hanuman Ashtak full Pdf

" हनुमानाष्टक का पाठ अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। “बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो” से प्रारंभ होने वाला यह स्तोत्र भक्तों के लिए विशेष फलदायी है। हनुमान चालीसा के साथ इसका नियमित पाठ करने से मंगल दोष और भय का नाश होता है। यदि प्रतिदिन पाठ संभव न हो, तो कम से कम मंगलवार और शनिवार को हनुमानाष्टक का पाठ अवश्य करें।

हनुमान चालीसा के साथ प्रतिदिन हनुमानाष्टक का पाठ करने से दोगुना लाभ प्राप्त होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसे भगवान बजरंगबली की भक्ति में रचा है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से संकटमोचन हनुमानजी का स्मरण करते हुए हनुमानाष्टक का पाठ करते हैं, उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं। इसलिए आप भी श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमानाष्टक का पाठ करें। "



 बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।

ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।


देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो।


कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।


अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहां पगु धारो।


हेरी थके तट सिन्धु सबे तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मरो।

चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
.
बान लाग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सूत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।

आनि सजीवन हाथ दिए तब, लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

रावन जुध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो।




संकट मोचन हनुमान अष्टक




आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

बंधू समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो।

जाये सहाए भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होए हमारो।
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।





।। दोहा। ।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।




🔎 Frequently Asked Questions (FAQ)

Q1. संकट मोचन हनुमान अष्टक क्या है?
यह हनुमान जी की स्तुति में रचित एक शक्तिशाली अष्टक है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है।

Q2. संकट मोचन हनुमान अष्टक पढ़ने के क्या लाभ हैं?
इसका पाठ करने से जीवन के संकट, भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं तथा मन को शांति मिलती है।

Q3. संकट मोचन हनुमान अष्टक कब पढ़ना चाहिए?
इसे मंगलवार और शनिवार को पढ़ना विशेष फलदायक माना जाता है। इसे सुबह या शाम कभी भी पढ़ सकते हैं।

Q4. क्या संकट मोचन हनुमान अष्टक रोज पढ़ सकते हैं?
हाँ, इसका नियमित पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है।

Q5. क्या यह अष्टक नकारात्मक शक्तियों से बचाता है?
हाँ, इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा, डर और ऊपरी बाधाओं से रक्षा होती है।

Q6. क्या संकट मोचन हनुमान अष्टक से मनोकामना पूरी होती है?
सच्चे मन और श्रद्धा से पाठ करने पर मनोकामनाओं की पूर्ति और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।